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Good News: सिलाव खाजा के बाद नालंदा की बावनबूटी साड़ी की वैश्‍व‍िक बाजार में होगी धमक, जल्‍द मिलेगा GI टैग

Nalanda Bawanbooti Saree: सिलाव खाजा को जीआई टैग मिल चुका है. बावनबूटी साड़ी को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग भी बढ़ेगी. जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
Nalanda Bawanbooti Saree: सिलाव खाजा को जीआई टैग मिल चुका है. बावनबूटी साड़ी को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग भी बढ़ेगी. जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
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Nalanda Bawanbooti Saree: सिलाव खाजा को जीआई टैग मिल चुका है. बावनबूटी साड़ी को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग भी बढ़ेगी. जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

लाजवाब स्‍वाद के लिए मसहूर नालंदा के सिलाव खाजा को जीआई टैग मिलने के बाद अब यहां की बावनबूटी साड़ी को भी जल्‍द जीआई टैग (GI Tag) म‍िलने जा रहा है. नाबार्ड की ओर से इसकी पहल की गई है. बहुत जल्द इसको लेकर अच्छी खबर आने वाली है.

जीआई टैग मिलने के बाद बावनबूटी साड़ी की अपनी अलग पहचान होगी. इसे देश ही नहीं विदेशों में भी बेचना आसान होगा. खरीदारों को बावनबूटी साड़ी पहुंचाने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी. साथ ही साड़ी की मांग भी बढ़ेगी, इससे बुनकरों के घरों में आर्थिक समृद्धि आएगी. रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. 

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अमृत कुमार बरनवाल ने बताया कि बावनबूटी साड़ी को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 12 मई को जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया है. उम्मीद है कि जल्द ही जीआई टैग मिल जाएगा. इससे नालंदा के बुनकरों के हुनर को वैश्विक पहचान मिलेगी. बुनकर अपने उत्पाद को कहीं भी भेज सकेंगे. जीआई टैग मिलने से बुनकरों को बड़ा बाजार मिलेगा.