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बीजेपी ने भागलपुर सीट से आखिर क्यों काटा शाहनवाज हुसैन का टिकट, जानिए पूरा विश्लेशण बीजेपी ने भागलपुर सीट से आखिर क्यों काटा शाहनवाज हुसैन का टिकट, जानिए पूरा विश्लेशण बीजेपी ने भागलपुर सीट से आखिर क्यों काटा शाहनवाज हुसैन का टिकट, जानिए पूरा विश्लेशण

बीजेपी ने भागलपुर सीट से आखिर क्यों काटा शाहनवाज हुसैन का टिकट, जानिए पूरा विश्लेशण Featured

भागलपुर सीट से बिहार की राजनीति में वापस आने वाले सुशील मोदी ने सीट छोड़ दी और उप- मुख्यमंत्री का पद संभाला. शहनवाज ने 14वें लोकसभा चुनाव में फिर से जीत के साथ एंट्री मारी. इस सीट पर सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड जमीलूर रहमान और तस्लीमुद्दीन के नाम है.

 

 

 

नई दिल्ली: साल 1999 में सैयद शाहनवाज हुसैन ने उस समय इतिहास रच दिया था जब उन्होंने बीजेपी की तरफ से लोकसभा चुनाव में बिहार के मुस्लिम प्रभुत्व किशनगंज चुनवी छेत्र से जीत दर्ज की. ये जीत उस समय मौजूद रहे बीजेपी के उभरते चेहरे मुख्तार अब्बास नकवी से भी बड़ी थी. नकवी को 13वें लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था. नकवी उस समय रामपुर से सासंद थे और केंद्रीय मंत्री भी.

 

शहनवाज की उम्र उस समय मात्र 30 साल थी और उस समय उन्हें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्री परिषद में शामिल किया गया. अगले दो सालों में उन्हें राज्य का कोल मंत्री बना दिया गया और कैबिनेट की रैंक दे दी गई. 32 साल की उम्र में वो यूनियन कैबिनेट मंत्री बनने वाले सबसे युवा नेता था. तो वहीं उन्हें कपड़ा मंत्रालय का भी चार्ज दे दिया गया. शहनवाज बीजेपी के सबसे युवा और जोशीले मुस्लिम चेहरे के रुप में सामने आने लगे जिन्हें वाजपेयी और आडवाणी दोनों पसंद करते थे.

 

 

भागलपुर सीट से बिहार की राजनीति में वापस आने वाले सुशील मोदी ने सीट छोड़ दी और उप- मुख्यमंत्री का पद संभाला. शहनवाज ने 14वें लोकसभा चुनाव में फिर से जीत के साथ एंट्री मारी. उन्हें साल 2009 में यानी की 15वें लोकसभा चुनाव में फिर से जीत मिली और वो तीसरी बार सांसद चुने गए. लेकिन साल 2014 में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा जो काफी करीब था. उन्हें पार्टी के अहम चेहरे में रखा गया तो वहीं किसे टिकट दिया जाना चाहिए इसका फैसला भी शहनवाज पर ही छोड़ दिया गया.

 

क्या है इस सीट का इतिहास

 

भागलपुर लोकसभा क्षेत्र के इतिहास में सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड चुनचुन प्रसाद यादव के नाम दर्ज है. 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े चुनचुन यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी भागवत झा आजाद को चार लाख से अधिक मतों से पराजित किया था. वहीं सबसे कम मतों से हार-जीत का अंतर 2014 के लोकसभा चुनाव में रहा.
इस सीट पर सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड जमीलूर रहमान और तस्लीमुद्दीन के नाम है. दोनों किशनगंज लोकसभा सीट से 3-3 बार सांसद चुने गए हैं. जमीलूर रहमान कांग्रेस के टिकट पर 1971, 1980 और 1984 में दिल्ली पहुंचे. तस्लीमुद्दीन 1996 में जनता दल, 1998 और 2004 में राजद के टिकट पर लोकसभा पहुंचे.

 

एक बार फिर शहनावज चर्चे में

 

अब 20 साल बाद शहनवाज एक बार फिर चर्चे में हैं. इस बार चर्चा का विषय है भागलपुर लोकसभा सीट जहां से वो तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें से उन्हें दो बार जीत हासिल हुई है तो वहीं एक बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. इस बार वो चौथी बार चुनाव लड़न की तैयारी कर रहे थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

 

भागलपुर में मुसलमानों और यादव लोगों का गढ़ है. लेकिन बीजेपी साल 2004, 2006 और 2009 तीनों बार ये सीट जीतने में कामयाब रही. जहां अब शहनवाज के अलावा इस सीट पर किसी दूसरे चेहरे को रखने का ऑप्शन बीजेपी के पास अब नहीं बचा है. इससे पहले ये भी कहा जा रहा था कि उन्हें अररिया से चुनाव लड़वाया जा सकता है लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया.

 

बीजेपी की चुनाव समिती में शहनवाज का अभी भी मुख्य रोल है लेकिन फिलहाल वो झटके में हैं जहां वो अपनी सीट नहीं बचा पाए. ऐसे में ये साव तो जरूर उठता है कि एक तरफ जहां शहनवाज सभी जरूरी पैनल पीएम मोदी. बीजेपी चीफ अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, सुष्मा स्वराज और नीतिन गडकरी के साथ बांटते हैं तो ऐसे में उन्हें इस बार टिकट क्यों नहीं दिया गया.

 

टिकट न मिलने पर विवाद

 

गौरतलब है कि 23 मार्च को शाहनवाज हुसैन ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि'मैं इस बार भागलपुर से चुनाव नहीं लड़ूंगा. बिहार में एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने मेरी सीट समेत छह सीटें ले ली हैं, जहां पर मौजूदा भाजपा सांसद हैं. हालांकि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, लेकिन पार्टी के लिए कड़ी मेहनत करूंगा.'

 

बता दें कि भाजपा का सॉफ्ट मुस्लिम चेहरा कहे जाने वाले शाहनवाज हुसैन पिछले लोकसभा चुनाव में शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल से 9,485 वोटों से हार गए थे.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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