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BJP-PDP गठबंधन की दलील देते हुए कपिल सिब्बल का अमित शाह से सवाल- ‘आप किस गैंग में थे?’

BJP-PDP गठबंधन की दलील देते हुए कपिल सिब्बल का अमित शाह से सवाल- 'आप किस गैंग में थे?'
BJP-PDP गठबंधन की दलील देते हुए कपिल सिब्बल का अमित शाह से सवाल- 'आप किस गैंग में थे?'
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जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय के चुनावों से पहले प्रदेश की राजनीति में गुपकर गठबंधन को लेकर घमासान मच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) को “नापाक वैश्विक गठजोड़” करार दिया जो कांग्रेस के साथ आतंक और अशांति के दौर की वापसी चाहता है।

उनके इस बयान पर कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई और टिप्पणी को निराधार बताते हुए इन दलों ने मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका बयान भाजपा की कुंठा को दर्शाता है जो यह जानकर परेशान है कि जम्मू कश्मीर के चुनावों में एकीकृत राजनीतिक समूह साथ लड़ेंगे।

इसी बीच अमित शाह के बयान को कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने आड़े हाथों लेते हुए बीजेपी को पीडीपी के साथ 2014 में गठबंधन करने के लिए कठघरे में खड़ा किया है। सिब्बल ने ट्वीट करते हुए शाह से पूछा कि क्या भाजपा-पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीपी) का गठबंधन जम्मू-कश्मीर में “आतंक को वापस लाने” के लिए किया गया था। राज्यसभा सांसद ने गृह मंत्री से भी पूछा, “आप किस गिरोह का हिस्सा थे?”

बता दें, 2015 में, बीजेपी ने पीडीपी के साथ गठबंधन किया, क्योंकि 2014 के विधानसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को जम्मू-कश्मीर राज्य में बहुमत नहीं मिला। हालांकि, 2018 में, भाजपा ने पीडीपी के साथ अपनी गठबंधन सरकार से हाथ खींच लिया।

वहीं एक के बाद एक कई ट्वीट कर शाह ने मंगलवार को पीएजीडी को “गुपकर गैंग” करार दिया और आरोप लगाया कि वह जम्मू कश्मीर में विदेशी ताकतों का हस्तक्षेप चाहता है।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस और गुपगर गैंग जम्मू कश्मीर को आतंक और अशांति के युग में वापस ले जाना चाहते हैं। अनुच्छेद 370 को हटाकर हमने वहां के दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को जो अधिकार प्रदान किए हैं उसे वे वापस लेना चाहते हैं। यही कारण है कि उन्हें देश की जनता हर जगह से खारिज कर रही है।”

शाह का यह बयान जिला विकास परिषद के 25 नवंबर को होने वाले पहले चरण के चुनावों से पहले आया है। केंद्र द्वारा पिछले साल पांच अगस्त को राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू कश्मीर और लद्दाख- में विभाजित करने के फैसले के बाद राज्य में यह पहली राजनीतिक कवायद है।

केंद्र द्वारा अनुच्छेद 370 को रद्द करने की घोषणा करने से एक दिन पहले चार अगस्त 2019 को भाजपा को छोड़कर कश्मीर के राजनीतिक दलों की एक बैठक नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला के श्रीनगर में गुपकर रोड स्थित घर पर हुई थी और अनुच्छेद 370 की रक्षा के लिये इसमें एक घोषणापत्र जारी किया गया था।

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा इस गठबंधन में माकपा, पीपल्स कॉन्फ्रेंस, आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस, भाकपा और पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल द्वारा गठित पीपल्स मूवमेंट भी शामिल हैं। फैसल ने हालांकि बाद में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।